एन.सी.सी. ;राष्ट्रीय कैडेट कोरद्ध एवं नाॅन एन.सी.सी. विद्यार्थियों में व्यक्तिगत मूल्यों का अध्ययन
(श्रीमती) शिखा बनर्जी
सहायक प्राध्यापक, अध्यापक शिक्षा संस्थान, पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर
सार संक्षेप
एन.सी.सी. ;राष्ट्रीय कैडेट कोरद्ध एक प्रकार की अनौपचारिक शिक्षण, प्रशिक्षण योजना है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को शारीरिक रूप से मजबूत, मानसिक रूप से जागरूक तथा नैतिक रूप से सुशिष्ट बनाना है, ताकि विद्यार्थियों में समुचित व्यक्तिगत मूल्यों का निर्माण हो सके और भविष्य में वे सभी प्रकार की कठिनाईयों का सामना करने में सक्षम हो सके। मूल्य वह है, जिसका महत्व है, जिसके पाने के लिये व्यक्ति और समाज चेष्टा करते है, जिसके लिये वे जीवित रहते है, और जिसके लिये वे बड़े से बड़ा त्याग कर सकते है।वर्तमान परिप्रेक्ष्य में व्यक्तिगत मूल्यो ं का पतन अत्यंत तीव्र गति से हो रहा हैं। प्रस्तुत शोध मंे एन.सी.सी. एवं नाॅन एन.सी.सी. विद्यार्थियो के व्यक्तिगत मूल्यों का अध्ययन किया गया एवं पाया गया कि नाॅन एन.सी.सी. विद्यार्थियो की अपेक्षा एन.सी.सी. विद्यार्थियों में प्रजातांत्रिक मूल्य, सामाजिक मूल्य, स्वास्थ्य मूल्य अधिक विकसित है तथा धार्मिक मूल्य अपेक्षाकृत कम है।
मुख्य शब्द बिंदु - एन.सी.सी. ;राष्ट्रीय कैडेट कोरद्धए व्यक्तिगत मूल्य
प्रस्तावना
बालक के सर्वांगीण विकास के लिये विद्यालय में पाठ्य सहगामी क्रियाओं का संचालन किया जाता है। इसके लिये पाठ्यक्रम में खेलकूद, साहित्यिक, सांस्कृतिक, क्रियाकलाप, एन.सी.सी.,एन.एस.एस., रेडक्रास व स्काउटिंग गाईडिंग को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। राष्ट्र के लिये उत्तम नागरिकों के निर्माण के लिये एन.सी.सी. की शिक्षण नामप्रद रही है।एन.सी.सी. प्रशिक्षण से व्यक्तिगत मूल्यों से संबंधित भावनाओं एवं उनके निर्माण पर सकारात्मक रूप से प्रभाव पड़ता है। एन.सी.सी. भारत का सबसे बड़ा युवा संगठन है, सभी राज्यों में कोर की युनिटें संकलित की गई है। विद्यालयों महाविद्यालयों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थाओं के संस्थानों के छात्रों को शामिल किया जाता है। भारतीय सेवा संगठन तथा प्रादेशिक शासन के संयुक्त सहयोग से यह संगठन कार्यरत है।
एन.सी.सी. का सामान्य अर्थ राष्ट्रीय कैडेट कोर है। इसका तात्पर्य एक बालक के अंदर ऐसी भावना का विकास करना है। जो सामाजिक दृष्टि से राष्ट्र के हित में हो व्यापक रूप से कहा जा सकता है, कि एक राष्ट्रीय कैडेट कोर छात्र/छात्रा के अंदर साहसिक क्रियाकलाप, खेल भावना तथा निः स्वार्थ सेवा के आदर्शों को विकसित करना है, अर्थात् एन.सी.सी. का अर्थ छात्र-छात्राओं के अंदर ध्येय वाकय एकता और अनुशासनात्मक का विकास करना है। एन.सी.सी. वह माध्यम है जिससे विद्यार्थियों में व्यक्तिगत मूल्यों का विकास किया जाता है।
मूल्य वह है, जिसका महत्व है, जिसके पाने के लिये व्यक्ति और समाज चेष्टा करने है, जिसके लिये वे जीवित रहते है और जिसके लिये वे बड़े से बड़ा त्याग कर सकते है। मूल्य वे मानदण्ड है जो कि किसी समाज में उपलब्ध वैकल्पिक साधन तथा लक्ष्यों में से उपर्युक्त साधन तथा लक्ष्य चुनने में सहायता करते है तथा मानव व्यवहार का निर्धारण करते हैं। व्यक्तिगत मूल्यों में धार्मिक विश्वास, नैतिक अभिवृत्ति जीवन दर्शन व राजनैतिक आदर्श सम्मिलित होते है।
मूल्य जीवन के निदेशक सिद्वांत है। जो व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक कल्याण व समायोजन और संस्कृति के द्वारा संचालित होते है।
नायक, गोपाल प्रसाद (2009) ने मूल्यों के विकास में शिक्षण संस्थानों की भूमिका को उललेखनीय पाया। उन्होंने पाया कि मूल्यों की सीख तथा आदर्श प्रस्तुति में घनिष्ठ संबंध है। खरे, ऊषा(2009) ने पाया कि उच्च सृजनात्मक विद्यार्थियों में स्वास्थ्य मूल्य उच्च पाया गया, जबकि कम सृजनातमक विद्यार्थियों में शक्ति मूल्य उच्च पाया गया। साहनी, मधु(2009) ने पाया कि माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के ज्ञानात्मक मूल्य सर्वाेच्च एवं धार्मिक मूल्य निम्न है तथा कलात्मक मूल्य शक्ति मूल्य एवं ज्ञानात्मक मूल्यों के संदर्भ में लिंग के आधार पर विभिन्नता पायी जाती है।
जार्ज,जेसी एवं राजेन्द्र (2007) ने पाया कि किशोरी के मूल्यों में लिंग के संदर्भ में रहन सहन, आर्थिक आधार के संदर्भ में विभिन्नता पायी जाती है।
पाण्डेय ब्रजेश कुमार(2004) ने अपने अध्ययन में पाया कि शिक्षक ही विद्यार्थियों में मानव मूल्यों का विकास कर सकते है। ,
माध्यमिक शिक्षा आयोग(1952-53) ने शिक्षा के द्वारा विभिन्न मूल्यों की स्थापना पर बल दिया है। कोठारी आयोग (1964-60) मूल्य शिक्षा की आवश्यकता का अनुभव करते हुए, शिक्षा आयोग ने मूल्यों के विकास में विद्यालय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है, राष्ट्रीय शिक्षा नीति(1986) ने इस बात पर चिंता प्रकट की है, कि विद्यार्थियों में बौद्धिक उच्चतम मूल्यों का विकास नहीं हो पा रहा है। तथा राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा की रूपरेखा (2000) में विद्यार्थी शिक्षा के सभी स्तरों पर मूल्यों के विकास की बात की है।
उक्त अध्ययन में यह जानने का प्रयास किया गया है, कि विद्यार्थियों में एन.सी.सी. के माध्यम से वांछित उच्चतम मूल्यों का विकास किस स्तर तक हो पाया है।
उद्देश्य:-
1. एन.सी.सी. एवं नाॅन एन.सी.सी. विद्यार्थियों के प्रजातांत्रिक मूल्यों का अध्ययन करना।
2. एन.सी.सी. एवं नाॅन एन.सी.सी विद्यार्थियों के सामाजिक मूल्योें का अध्ययन करना।
3. एन.सी.सी. एवं नाॅन एन.सी.सी. विद्यार्थियों के स्वास्थ्य मूल्यों का अध्ययन करना।
4. एन.सी.सी. एवं नाॅन एन.सी.सी. विद्यार्थियों के धार्मिक मूल्यों का अध्ययन करना।
परिकल्पना:-
1. एन.सी.सी. एवं नाॅन एन.सी.सी. विद्यार्थियों के प्रजातांत्रिक मूल्यों में सार्थक अंतर नहीं पाया जायेगा।
2. एन.सी.सी. एवं नाॅन एन.सी.सी विद्यार्थियों के सामाजिक मूल्यों में सार्थक अंतर नहीं पाया जायेगा।
3. एन.सी.सी. एवं नाॅन एन.सी.सी. विद्यार्थियों के स्वास्थ्य मूल्यों में सार्थक अंतर नहीं पाया जायेगा।
4. एन.सी.सी. एवं नाॅन एन.सी.सी. विद्यार्थियों के धार्मिक मूल्यों में सार्थक अंतर नहीं पाया जायेगा।
न्यादर्श:-
न्यादर्श हेतु रायपुर के हायर सेकन्ड्री स्कूलों के एन.सी.सी. एवं नाॅन एन.सी.सी. विद्यार्थियों का चयन किया गया है। शोध हेतु 100 विद्यार्थियों का चयन किया गया है। जिसमें 50 विद्यार्थी छण्ब्ण्ब्ण् प्रशिक्षण प्राप्त एवं 50 विद्यार्थी छण्ब्ण्ब्ण् से संबंधित नहीं थे। न्यादर्श चयन हेतु संभाव्य साधारण अनियमित विधि का प्रयोग किया गया है।
शोध विधि:-
शोध अध्ययन हेतु वर्णात्मक सर्वेक्षण विधि का प्रयोग किया गया है।
उपकरण:-व्यक्तिगत मूल्यों के अध्ययन हेतु डाॅ. जी.पी.शैरी एवं डाॅ. आर.पी.वर्मा द्वारा निर्मित व्यक्तिगत मूल्य प्रश्नावली का प्रयोग किया गया है। प्रश्नावली में कुल 40 प्रश्न है, जो विभिन्न मूल्यों से संबंधित है। जैसे:- प्रजातांत्रिक मूल्य ज्ञानात्मक मूल्य, सामाजिक मूल्य, स्वास्थ्य मूल्य आदि प्रश्नावली के द्वारा मूल्यों को पांच स्तर ।एठएब्एक्एम् में बांटा गया है।
प्रदत्तों को छण्ब्ण्ब्ण् एवं छवद छण्ब्ण्ब्ण् समूहों के आधार पर आवृत्तियों को एकत्र किया गया। आवृत्तियों को पांच स्तरों ।एठएब्एक्एम् में विभाजित किया गया है। तत्पश्चात् स्वतंत्र वितरण परिकल्पना के सत्यापन हेतु काई वर्ग (ग्2) मान कर गणना की गई है। गणना द्वारा प्राप्त मान 28.79 रहा। स्वतंत्रता की कोटी ;कद्धि त्र 4 के आधार पर तालिका मान 0.05 स्तर पर 9.48 एवं 0.01 स्तर पर 13.27 है। गणना द्वारा शून्य परिकल्पना अस्वीकृत की जाती है। छण्ब्ण्ब्ण् एवं छवद छण्ब्ण्ब्ण् के प्रजातांत्रिक मूल्य में सार्थक अंतर पाया गया।
ंछण्ब्ण्ब्ण् एवं छवद छण्ब्ण्ब्ण् समूहों की प्राप्त आवृत्तियों को विभिन्न स्तरों ।एठएब्एक्एम् के आधार पर एकत्र किया गया। स्वतंत्र विवरण परिकल्पना के सत्यापन हेतु काई वर्ग (ग्2) मान कर गणना की गई है। गणना द्वारा प्राप्त मान 11.62 प्राप्त हुआ। स्वतंत्रता की कोटी ;कद्धि त्र 4 के आधार पर तालिका मान 0.05 स्तर पर 9.48 एवं 0.01 स्तर पर 13.27 है। गणना द्वारा प्राप्त मान 0.05 स्तर के मान से अधिक है। अतः शून्य परिकल्पना अस्वीकृत की जाती है। छण्ब्ण्ब्ण् एवं छवद छण्ब्ण्ब्ण् के विद्यार्थियों में सामाजिक मूल्यों में सार्थक अंतर पाया गया।
ंछण्ब्ण्ब्ण् एवं छवद छण्ब्ण्ब्ण् समूहों की प्राप्त आवृत्तियों को विभिन्न स्तरों ।एठएब्एक्एम् के आधार पर एकत्र किया गया। छण्ब्ण्ब्ण् विद्यार्थियों में सबसे अधिक आवृत्तियां औसत स्तर ;ब्द्ध मेें 29 पायी गई। एवं छवद छण्ब्ण्ब्ण् विद्यार्थियों में सबसे अधिक आवृत्तियां औसत से कम स्तर ;क्द्ध मेें 28 पायी गई। गणना द्वारा प्राप्त काई वर्ग (ग्2) का मान 20.48 प्राप्त हुआ है। जो कि तालिका मान 0.05 स्तर एवं 0.01 स्तर अधिक है। अतः शून्य परिकल्पना अस्वीकृत की जाती है। छण्ब्ण्ब्ण् एवं छवद छण्ब्ण्ब्ण् के विद्यार्थियों में स्वास्थ्य मूल्यों में सार्थक अंतर पाया गया।
ंछण्ब्ण्ब्ण् एवं छवद छण्ब्ण्ब्ण् विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त प्रदत्तों के पांच स्तरों ।एठएब्एक्एम् में विभाजित किया गया। प्र्राप्त आवृत्तियों में छण्ब्ण्ब्ण् विद्यार्थियों में सबसे अधिक आवृत्तियां ;क्द्ध औसत से कम स्तर पर 25 प्राप्त हुई एवं छवद छण्ण्ब्ण्ब्ण् समूह में औसत स्तर ;ब्द्ध में 21 प्राप्त हुई। परिकल्पना के सत्यापन हेतु काई वर्ग (ग्2) के मान की गणना की गई, प्रापत मान 28.5 रहा। स्वतंत्रता की कोटी ;कद्धि त्र 4 के आधार पर तालिका मान 0.05 स्तर पर 9.48 एवं 0.01 स्तर पर तालिका मान से गणना द्वारा प्राप्त मान अधिक रहा। अतः शून्य परिकल्पना अस्वीकृत की जाती है। छण्ब्ण्ब्ण् एवं छवद छण्ब्ण्ब्ण् के विद्यार्थियों में धार्मिक मूल्यों में सार्थक अंतर पाया गया।
परिणाम एवं व्याख्या:-
1. छण्ब्ण्ब्ण् एवं छवद छण्ब्ण्ब्ण् के विद्यार्थियों के प्रजातांत्रिक मूल्यों में विभिन्न स्तरों पर सार्थक अंतर पाया गया। छण्ब्ण्ब्ण् के छात्रों में प्रजातांत्रिक मूल्य सबसे अधिक औसत ;ब्द्ध स्तर पर एवं छवद छण्ब्ण्ब्ण् के छात्रों में प्रजातांत्रिक मूल्य सबसे अधिक औसत से कम ;क्द्ध स्तर पर प्राप्त हुआ है। अतः छवद छण्ब्ण्ब्ण् की तुलना में छण्ब्ण्ब्ण् छात्रों में प्रजातांत्रिक मूल्य अधिक है।
2. छण्ब्ण्ब्ण् एवं छवद छण्ब्ण्ब्ण् के विद्यार्थियों के सामाजिक मूल्यों में विभिन्न स्तरों पर सार्थक अंतर एवं छण्ब्ण्ब्ण् के छात्रों में सामाजिक मूल्य सबसे अधिक औसत से अधिक ;ठद्ध स्तर पर एवं छवद छण्ब्ण्ब्ण् के छात्रों में सामाजिक मूल्य औसत से कम ;क्द्ध स्तर पर प्राप्त हुआ है। अतः छवद छण्ब्ण्ब्ण् की तुलना में छण्ब्ण्ब्ण् छात्रों में सामाजिक मूल्य अधिक है।
3. छण्ब्ण्ब्ण् एवं छवद छण्ब्ण्ब्ण् के विद्यार्थियों के स्वास्थ्य मूल्यों में विभिन्न स्तरों पर सार्थक अंतर एवं छण्ब्ण्ब्ण् के छात्रों में सामाजिक मूल्य सबसे अधिक औसत ;ब्द्ध स्तर पर एवं छवद छण्ब्ण्ब्ण् के छात्रों में सामाजिक मूल्य सबसे अधिक औसत से कम ;क्द्ध स्तर पर प्राप्त हुआ है। अतः छवद छण्ब्ण्ब्ण् की तुलना में छण्ब्ण्ब्ण् छात्रों में स्वास्थ्य मूल्य अधिक है।
4. छण्ब्ण्ब्ण् एवं छवद छण्ब्ण्ब्ण् के विद्यार्थियों के धार्मिक मूल्यों में विभिन्न स्तरों पर सार्थक अंतर एवं छण्ब्ण्ब्ण् के छात्रों में धार्मिक मूल्य सबसे कम औसत ;क्द्ध स्तर पर अधिक है। एवं छवद छण्ब्ण्ब्ण् के छात्रों में धार्मिक ;ब्द्ध स्तर पर धार्मिक मूल्य अधिक है। अतः छण्ब्ण्ब् की तुलना में छवद छण्ब्ण्ब्ण् छात्रों में धार्मिक मूल्य अधिक है।
निष्कर्ष:-
1. छवद छण्ब्ण्ब्ण् की तुलना में छण्ब्ण्ब्ण् छात्रों में प्रजातांत्रिक मूल्य अधिक है। अतः विद्यार्थियों में छण्ब्ण्ब्ण् प्रशिक्षण के द्वारा प्रजातांत्रिक मूल्यों का विकास अधिक हुआ है।
2. छवद छण्ब्ण्ब्ण् की तुलना में छण्ब्ण्ब्ण् छात्रों में सामाजिक मूल्य अधिक है। अतः विद्यार्थियों में छण्ब्ण्ब्ण्प्रशिक्षण के द्वारा सामाजिक मूल्यों का विकास अधिक हुआ है।
3. छवद छण्ब्ण्ब्ण् की तुलना में छण्ब्ण्ब्ण् छात्रों में स्वास्थ्य मूल्य अधिक है। अतः विद्यार्थियों में छण्ब्ण्ब्ण्प्रशिक्षण के द्वारा स्वास्थ्य मूल्यों का विकास अधिक हुआ है।
4. छवद छण्ब्ण्ब्ण् की तुलना में छण्ब्ण्ब्ण् छात्रों में धार्मिक मूल्य कम है। अतः विद्यार्थियों में छण्ब्ण्ब्ण्प्रशिक्षण के द्वारा धार्मिक मूल्यों का विकास कम हुआ है। अधिक धार्मिकता वैज्ञानिक अभिवृत्ति के विकास में बाधक हैं।
संदर्भ:-
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Received on 15.09.2013
Revised on 05.10.2013
Accepted on 02.10.2013
© A&V Publication all right reserved
Research J. Humanities and Social Sciences. 4(4): October-December, 2013, 572-575